Some shayari…

अब है सोचा कि तुझको न अब सोचेंगे महज़ ख़याल की ख़ुशबू से महक उठते हैं। सरे महफ़िल ख़ामोश ही रहते हैं हम बात बे बात पे बेवजह चहक उठते हैं। तेरी गलियों में आना यूँ छोड़ दिया तेरे कूचे से जो गुज़रे तो बहक उठते हैं। नशा तेरी नज़र का है या मयख़ाना? ज़रा […]