यादों के पार

   हम मिलें हैं क्या? बंद दरवाज़ों के आर पार कभी? एक ख़्वाब में, जो शायद  कभी देखा ही नहीं? या ग़ज़ल में किसी जो अभी कहनी बाक़ी है? उस लफ़्ज़ में जो, अनबोला, मेरे होंठों पे बैठा है उदास या अनपढ़ा, पड़ा  इंतज़ार में  इक किताब में? हम मिलें हैं कभी? धुएँ में उस […]